पूज्य आश्रम साहिब की स्थापना

भारत–पाक विभाजन के समय सखी बाबा के बहुत से अनुयायी भारत में विस्थापित हो चुके थे, जिनके निवेदन को स्वीकार करके बाबासाईं चाँडूराम जी कई बार भारत की यात्रा कर चुके थे। भारत के अनुयायियों द्वारा लखनऊ में आश्रम की स्थापना हेतु विनती करने पर बाबासाईं जी ने अपनी स्वीकृति प्रदान की। आश्रम साहिब के लिए वही स्थान चुना गया जहाँ पर वर्ष 1960 में भारत आगमन पर सखी बाबा जी ने ध्यान किया था। वर्ष 1977 में बाबासाईं जी की पावन उपस्थिति में भूमि–पूजन सम्पन्न हुआ। वर्ष 1979 में बाबासाईं जी का स्थायी रूप से भारत आगमन हुआ। सद्गुरु संत कंवरराम साहिब जी ने सखी बाबा जी को शिवस्वरूप की उपाधि से अलंकृत किया था, इसलिए बाबासाईं द्वारा आश्रम साहिब का नाम शिव शान्ति सन्त आसूदाराम आश्रम रखा गया। 3 सितम्बर 1979 के दिन संत कंवरराम साहिब जी के सुपुत्र साईं पेशुराम साहिब जी के करकमलों से शिव शान्ति सन्त आसूदाराम आश्रम का उद्घाटन सम्पन्न हुआ।

शिव शान्ति सन्त आसूदाराम आश्रम – परिचय

शिव शान्ति सन्त आसूदाराम आश्रम में दरबार साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना हुई तथा कुटिया साहिब में सच्चे साईं सतराम दास साहिब, अमर शहीद सन्त कंवरराम साहिब एवं सखी बाबा आसूदाराम साहिब की दर्शन साहिब की स्थापना हुई। उसी दिन से प्रारम्भ होकर अखण्ड पाठ साहिब के साथ-साथ सखी बाबा जी का निर्वाण महोत्सव प्रतिवर्ष मेले के रूप में मनाया जाता है। निर्वाण महोत्सव में भारतवर्ष के विभिन्न प्रदेशों तथा सिन्ध प्रान्त से आकर अनुयायी बाबा साईं के आशीर्वचनों को प्राप्त कर धन्यता का अनुभव करते हैं। शिव शान्ति सन्त आसूदाराम आश्रम अपने भव्य स्वरूप में आज सर्व समाज तथा विशेषकर हिन्दू–सिन्धी समाज के लिए एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक आस्था का केन्द्र है। सन्त श्री चाँडूराम साहिब जी के सत्संग एवं सेवा कार्यों द्वारा समाज में आध्यात्मिक चेतना एवं सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना हो रही है।

शिव शान्ति आश्रम : गतिविधियाँ एवं सेवाएँ

पूज्य बाबासाईं चाँडूराम साहिब जी के मार्गदर्शन में सुपुत्र साईं मोहनलाल जी एवं साईं हरीशालाल जी की कृपा सान्निध्य में शिव शान्ति आश्रम में दैनिक एवं वार्षिक गतिविधियाँ तथा विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्य निरन्तर हो रहे हैं।

दैनिक गतिविधियाँ एवं सेवाएँ
  1. ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान, योग एवं प्रवचन (अमृतवेला) प्रातः 4 बजे शब्दनाद के साथ ही आश्रमवासियों की दिनचर्या का शुभारम्भ होता है। सभी आश्रमवासी उन्हें सौंपी गई सेवानुसार अपनी-अपनी सेवाओं में जुट जाते हैं। सन्त कंवरराम साहिब की अलौकिक वाणी में गाए गए भजनों की मधुर स्वर-लहरियों से आश्रम साहिब का हर कोना गुंजायमान हो उठता है। प्रातः 6:00 बजे मंगल आरती के बाद पूज्य बाबासाईं जी के सान्निध्य में ध्यान-योग के साथ दिन का शुभारम्भ होता है।
  2. योगाभ्यास प्रातःकाल में बाबा रामदेव प्रणीत पतंजलि योग-पीठ की परंपरा के अनुरूप, अनुभवी योग केन्द्र द्वारा तीन सत्रों में योगाभ्यास करवाया जाता है। इस योगाभ्यास में आश्रमवासियों के साथ-साथ लखनऊ शहरवासी भी सम्मिलित होते हैं।
  3. नित्य सत्संग सुबह 10:30 बजे आशा दीवार कीर्तन तथा शाम 7 से 9:30 पूज्य साईं बाबा जी के भजन के साथ, मंगला-आरती, सखी बाबा की धुनी साहिब, भजन, श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पठन, सत्संग प्रवचन एवं प्रसाद वितरण का कार्यक्रम सम्पन्न होता है।
  4. भण्डारा साहिब आश्रम साहिब में अनवरत चलने वाले भण्डारे में आश्रमवासी तथा अतिथि गण भोजन-प्रसाद ग्रहण करते हैं।
  5. गौ सेवा सखी बाबा जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन गौ-सेवा में समर्पित किया था। उन्हीं की परम्परा एवं प्रेरणा से पूज्य बाबासाईं जी नित्य ही गौशाला जाकर गौ-माताओं की सेवा का निरीक्षण करते हैं। इस पवित्र संकल्प को पूज्य बाबासाईं जी अपने पौत्र आनन्दलाल, शुभमलाल एवं अनुयायियों में संस्कारित कर रहे हैं।
  6. विचार-विमर्श सामाजिक एवं पारिवारिक सुख-शान्ति हेतु आगन्तुकों की समस्याओं का समाधान एवं मार्गदर्शन पूज्य बाबासाईं की दिनचर्या का अभिन्न अंग है। प्रत्येक रविवार योग केन्द्र के लाभार्थियों को शारीरिक संयम एवं मानसिक एकाग्रता का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  7. आरोग्य सेवा सन्त बाबा आसूदाराम आरोग्य धाम एवं सन्त कंवरराम आरोग्य धाम में रोग-पीड़ित व्यक्तियों का नियमित उपचार किया जाता है। यह सेवाएँ देश के 20 से अधिक नगरों में संचालित हैं।
  8. ग्रंथालय आश्रम साहिब में स्थित समृद्ध पुस्तकालय में हिन्दी, सिन्धी, गुरुमुखी एवं अंग्रेज़ी भाषा की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पुस्तकें उपलब्ध हैं।
  9. सन्त कंवरराम संगीतालय गीत-संगीत एवं वाद्य-यंत्रों का नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे नई पीढ़ी में चेतना एवं संवेदना का विकास हो।
  10. संस्कारशाला पूज्य बाबासाईं के आचरण से अनुयायियों को अनुशासित, स्वच्छ एवं संस्कारित जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है, जिससे आत्मबोध एवं आत्मचेतना का विकास होता है।